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शिवराजविजयम् मे स्त्री – सुरक्षा एवं सम्मान

Author Name: Laxmi Bhaskar Date: 24-04-2026

शोधपत्र का सारांश (abstract)

भूमिका – वैदिक काल से ही भारतीय संस्कृति में नारी को सर्वोच्च स्थान प्रदान किया गया है , उसे केवल पारिवारिक संरचना का अंग नहीं, बल्कि धर्म, ज्ञान और समाज की सह- निर्मात्री के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। “ यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः ”  सूक्ति भारतीय समाज में स्त्री के पूजनीय और गरिमामय दृष्टिकोण को दर्शाती है। नारी  महान शक्ति का रूप है , वह सृजन, करुणा, धैर्य और त्याग की प्रतिमूर्ति है।

इसके उदाहरण अंबिकादत्त व्यास विरचित “शिवराजविजयम् ” में स्पष्ट रूप से वर्णित है। यह उपन्यास  केवल छत्रपति शिवाजी के आख्यान ही नहीं बल्कि, जिजाबाई , सौवर्णी और रोशनआरा जैसे पात्रों के माध्यम से उस युग के समाज में स्त्रियों के प्रति अन्याय और अत्याचार कृत्यों पर भी प्रकाश डालता है।

इस शोध पत्र में दो बिंदुओं पर मुख्य ध्यान दिया गया है-

 १- मुग़ल कालीन समाज में स्त्रियों की दशा और उनकी स्थिति  तथा

२-  मराठा  राज्य में स्त्रियों की स्थिति और स्त्रियों की सुरक्षा के लिए शिवाजी द्वारा किए गए प्रयत्न।

 विषय प्रतिपादन

१. मध्यकालीन भारत में स्त्रियों की स्थिति अत्यंत दयनीय और असुरक्षित हो गई थी। भारत में मुगल  आक्रमणों के कारण सामाजिक स्थिति बिगड़ने लगी थी ।

२. स्त्रियों की असुरक्षा, अपमान, अपहरण, सती प्रथा, शिक्षा का अभाव, आदि समस्याओं में बढ़ाव देखने को मिले ।

३. इस विषय पर एतिहासिक अध्ययन हो चुके है परंतु शिवराजविजयम् ग्रन्थ को आधार बना कर स्त्री सुरक्षा और सम्मान जैसे विषय पर कम ही अध्ययन हुआ है और जो हुआ है वह स्वतंत्र रूप से नहीं हुआ ।

४. इस शोध में मुग़ल काल में स्त्रियों की स्थिति कैसी थी तथा छत्रपति शिवाजी द्वारा स्त्री सुरक्षा और सम्मान जैसी समस्याओं के समाधान के लिए  क्या उपाय या नीतियाँ बनाई गई ।

 शोध के उद्देश्य

१. मुग़ल कालीन समाज में स्त्रियों की स्थिति का अध्ययन करना ।

२. शिवराजविजयम् उपन्यास में स्त्री पात्रों और प्रसंगों का गहन अध्ययन करना ।

३. शिवाजी  द्वारा स्त्री सुरक्षा के लिए किए प्रयासों पर प्रकाश डालना।

४. स्त्री – सुरक्षा और सम्मान जैसे विषय की वर्तमान प्रासंगिकता

 शोध पद्धति

इस शोध में मुख्यतः विश्लेषणात्मक और ऐतिहासिक पद्धति का प्रयोग किया गया है साथ ही शिवराजविजयम् ग्रन्थ का गहन अध्ययन करके औरंगजेब और शिवाजी के राज्य में स्त्रियों की स्थिति का तुलनात्मक विश्लेषण भी किया गया है।

 शोध के अपेक्षित परिणाम

१. यह स्पष्ट होगा कि वैदिक काल से मध्यकाल तक समय के साथ समाज में नारी स्थिति में गिरावट आई है।

२. शिवराजविजयम्  काव्य मध्य काल में स्त्री की स्थिति का यथार्थ चित्रण प्रस्तुत करता है।

३. यह स्पष्ट करना कि  छत्रपति शिवाजी के शासन काल में स्त्री सम्मान और सुरक्षा को महत्व दिया जाता था।

४. यह प्रदर्शित करना कि एक ही समय काल में भिन्न धर्म और जातियों द्वारा समाज में स्त्री के योगदान को भिन्न- भिन्न  दृष्टि से देखा गया ।

 

प्रमुख शब्दावली   नारी, स्त्री – सुरक्षा, स्त्री – सम्मान, मध्यकालीन समाज, शिवराजविजयम् , छत्रपति शिवाजी, राष्ट्रधर्म, सांस्कृतिक चेतना।

 

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