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आधुनिक संस्कृत गद्य काव्य में नारी – संवेदना और पर्यावरण चेतना

Author Name: Kavita Date: 24-04-2026

सारांश

अर्वाचीन संस्कृत साहित्य हो या आधुनिक हिंदी साहित्य, इन दोनों ही विषयों के साहित्य में गद्य काव्य एक महत्वपूर्ण साहित्यिक विधा के रूप में विकसित हुआ है। इस विधा में संवेदनशीलता, सामाजिक चेतना और भावनात्मकता का समन्वय दृष्टिगोचर होता है। वर्तमान के इस वैज्ञानिक युग में नारी संचेतना और पर्यावरण चेतना जैसे विषय भी साहित्य के प्रमुख विमर्श बन चुके हैं। आधुनिक संस्कृत गद्य काव्य में स्त्री का आत्मसम्मान, उसकी स्वतन्त्रता और सामाजिक अधिकारों के प्रति जागरूकता के साथ – साथ प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण की भावना भी स्पष्ट रूप से व्यक्त होती दिखाई पड़ती है। प्रस्तुत शोध – पत्र में आधुनिक गद्य काव्य के संदर्भ में नारी संचेतना और पर्यावरण चेतना के विभिन्न आयामों का अध्ययन किया गया है।

 कूट शब्द

संस्कृत साहित्य, गद्य काव्य, नारी संचेतना, पर्यावरण चेतना, प्रकृति, नारी शक्ति

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