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महाभारत की द्रौपदी: स्वाभिमानी स्त्री के रूप में

Author Name: Neha Sagar Date: 24-04-2026

भूमिका :- भारतीय महाकाव्य परंपरा में महाभारत अपना एक विशेष स्थान रखता है। महाभारत को केवल एक ऐतिहासिक या पौराणिक कथा ही नहीं, बल्कि भारतीय समाज का

शोध के उद्देश्य – प्रस्तुत शोध पत्र के उद्देश्य निम्नलिखित प्रकार से हैं –

महाभारत में द्रौपदी के चरित्र का अध्ययन करके उसके चरित्र को स्वाभिमानी स्त्री के रूप में विश्लेषित करना।

द्रौपदी के चरित्र में निहित स्वाभिमान, आत्मगौरव और आत्मसम्मान के तत्वों का विश्लेषण करना

आधुनिक नारी – विमर्श के परिप्रेक्ष्य में द्रौपदी के चरित्र की प्रासंगिकता का अध्ययन करना

भारतीय संस्कृति में द्रौपदी को नारी – अस्मिता के रूप में स्थापित करना

शोध के अपेक्षित परिणाम

प्रस्तुत शोध पत्र के परिमाण निम्नलिखित हैं –

प्रस्तुत शोध पत्र का उद्देश्य महाभारत की द्रौपदी को स्वाभिमानी स्त्री के रूप में विश्लेषित करना है।

इसके अध्ययन से स्पष्ट होगा कि द्रौपदी ने विषम परिस्थितियों में भी अपने आत्मसम्मान और स्वाभिमान को सर्वोपरि रखा।

प्रस्तुत शोध पत्र यह प्रतिपादित करेगा कि द्रौपदी का व्यक्तिव भारतीय समाज में नारी – अस्मिता और उसके अधिकारों का प्रतीक है।

शोध पद्धति – प्रस्तुत शोध पत्र  विश्लेषणात्मक और व्याख्यात्मक शोध पद्धति का शोध है। इसमें महाभारत का गहन अध्ययन कर द्रौपदी से संबंधित सभी प्रसंगों का सूक्ष्मता के साथ विश्लेषण किया गया है। इसके अतिरिक्त इस विषय से संबंधित विभिन्न शोध – लेखों और नारी – विमर्श संबंधी पुस्तकों का भी अध्ययन किया गया है।

प्रस्तुत शोध पत्र में प्राथमिक स्रोत में महाभारत और द्वितीयक स्रोत में शोध – पात्रों का उपयोग किया गया है

प्रमुख शब्दावली:-पौराणिक, ऐतिहासिक , विश्लेषित, आत्म गौरव, स्वामानिनी,ध्यूतसभा,ध्यूत क्रीड़ा, प्रतिरोध, प्रतिशोध, नारी अस्मिता।

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