Open Access     |    Last Date for Paper Submission: 30th March, 2026Call For Paper

पंचमहायज्ञ की आधार-शिला: नारी

Author Name: Shruti Rani Date: 24-04-2026

सारांश

भारतीय संस्कृति में नारी के बिना कोई भी धार्मिक अनुष्ठान, याज्ञिक क्रियाएँ व सामाजिक जीवन की सुन्दर कल्पना भी संभव नहीं है। नारी कर्म में क्रिया एवं धर्म में धुरी के रूप में सदैव उपस्थित है। वेदों में वर्णित यज्ञ का आधार नारी ही है, नारी के बिना यज्ञ संभव ही नहीं है। रामायण में भी भगवान श्री राम अपनी अर्धांगिनी सीता के बिना अश्वमेघ यज्ञ नहीं कर सकते थे, जिसका समाधान माता सीता की स्वर्ण मूर्ति को यज्ञ में बिठाया गया था तब जाकर उनका यज्ञ सुफल हुआ था। अतः नारी प्रत्येक धार्मिक अनुष्ठान एवं यज्ञिक क्रियाओं को सुफल मनोरथ प्रदान करने वाली, सदैव सम्माननीय होती है। अतः पुरुष को चाहिए कि वो नारी को सदैव प्रसन्न रखे चाहे वह पत्नी रूप में हो अथवा माता अथवा बहन अथवा कोई स्त्री ही क्यों न हो।

Description of the logo Downlaod PDF

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top