Author Name: Anju Tripathi Date: 24-04-2026
भूमिका :-
विषयों का आधान करने में साहित्य सदैव अग्रणी रहा है। इस साहित्य की समग्रता न केवल भाषा एवं भाव से है, बल्कि अनेक ऐसे विषय है जो साहित्य की सौंदर्यता को निखारते है। वैदिक साहित्य से लेकर आधुनिक साहित्य तक नारी का गौरवपूर्ण एवं सर्वोपरि स्थान रहा है| किंचित रूप से साहित्य की यह विडंबना देखी जाती है कि उसने पुरुषों को स्त्रियों की अपेक्षा अधिक सशक्त दिखाया वहीं स्त्रियाँ अधिक कोमल सहज एवं सरल स्वाभाव से युक्त रहीं, क्या वास्तव में वे अधिक सहज एवं सरल स्वाभाव की थी या ये उनकी मर्यादा की सीमा थी? जिसका उन्होंने कभी परित्याग नहीं किया। माता का कर्तव्य हो, पत्नी का दायित्व हो या फिर बहन का कर्तव्य हो, सभी कर्तव्यों के निर्वाह में उन्होंने अपना सर्वस्व न्योछावर किया| मातृत्व शक्ति से युक्त नारी को स्वर्ग से भी उत्तम बताया गया –
कालिदास ने स्वयं मालविकाग्निमित्रम् में स्त्रियों की प्रशंसा की –
निसर्गनिपुणा: स्त्रिया:’।
संरकृत जगत में अनेक ऐसे कवि हुये, जिन्होंने अपनी कवित्व शक्ति से साहित्य को मूर्धन्य बनाया। इस परम्परा में सर्वप्रथम कविकुलगुरु की उपाधि से विभूषित महाकवि कालिदास की गणना की जाती है. महाकवि कालिदान न केवल भारतीय संस्कृति की सनातन परंपरा के सम्पोषक रहे है बल्कि उन्होंने अपने काव्यादान से समस्त जगत को आलोकित किया, उनकी विलक्षण प्रतिभा की परिणति रही है कि काव्य का कोई भी पक्ष उनसे अछूता नहीं रहा।कवि ने ऐसे काव्य का सृजन किया जो युगों युगों तक उनकी विलक्षण प्रतिभा का परिचायक रहेगा। कवि की रचनाओं में अभिज्ञानशाकुंतलम् का स्थान अन्यतम है। इस ग्रन्थ में पुरुवंशीय राजा दुष्यंत एवं कण्व ऋषि द्वारा पालित शकुंतला की कथा का वर्णन किया गया है।यह ग्रन्थ नायिका प्रधान है। मुख्य नायिका के रूप में शंकुतला का व्यक्तित्व अत्यंत प्रभावशाली है। अन्य स्त्री पात्रों में शकुंतला की सखियाँ प्रियंवदा एवं अनसुया, गौतमी, हंसपादिका तथा अन्य स्त्री पात्रों का चित्रण प्राप्त होता है।
प्रस्तुत शोध पत्र का विषय “अभिज्ञानशाकुंतलम् और नारीवाद” है जिसका मुख्य उद्देश्य अभिज्ञानशाकुंतलम् का नारीवादी दृष्टिकोण से अध्ययन एवं विश्लेषण करना है। इस नाटक में शकुंतला, प्रियंवदा आदि अनेक नारी पात्र का चित्रण प्राप्त होता है, जिन्होंने अपने व्यक्तित्व से समाज को प्रेरित किया है।
शोध उद्देश्य :- प्रस्तुत शोध पत्र का उद्देश्य अभिज्ञानशाकुंतलम् की नायिकाओं कों एक स्वाभिमानी, स्वतंत्र विचारों वाली, सहनशीला आदि अनेक ओजस्वी गुणों से युक्त दिखाना है।और नारीवादी परिप्रेक्ष्य में उन्हें सबला नारी के रूप में चित्रित करना है।
शोध प्रविधि:- प्रस्तुत शोधपत्र में वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक शोध-प्रविधि का प्रयोग किया गया है। सर्वप्रथम नाटक के मूल संस्कृत पाठ का सूक्ष्म अध्ययन किया गया जो वर्णनात्मक शोध पद्धति के अंतर्गत आता है।तत्पश्चात् नारीवादी दृष्टिकोण से नायिकाओं की चारित्रिक विशेषताओं का विश्लेषण किया गया।
अपेक्षित परिणाम :– यह शोधपत्र नाटक में वर्णित स्त्री पात्रों की संवेदनशीलता, सहनशीलता तथा उनके चरित्र का नारीवादी दृष्टिकोण से विश्लेषण प्रस्तुत करेगा, साथ ही यह भी स्पष्ट करेगा की कवि का यह ग्रन्थ केवल श्रृंगार प्रधान काव्यात्मक ग्रन्थ नहीं है अपितु इस ग्रन्थ में कवि ने नारी में स्वतंत्रता, स्वाभिमानता,सहनशीलता आदि गुणों का आधान किया है जो आज की नारी के लिए भी अपेक्षित हैं।
बीज शब्द :- कालिदास,अभिज्ञानशाकुंतलम्, नारीवाद,नारी स्वतंत्रता, समानता।