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स्वप्नवासवदत्तम् में अन्तर्द्वंद्व के दो रूप: वासवदत्ता एवं प‌द्मावती।

Author Name: Deepshri Bansal Date: 24-04-2026

भूमिका-

संस्कृत नाट्य परम्परा में स्त्री को केवल प्रेम, सौंदर्य अथवा करुणा के रूप में ही न प्रस्तुत करके, उसके व्यक्तित्व में बौ‌द्धिक, नैतिक, मानसिक सामर्थ्य, भावनात्मक, राजनीतिक बोध आदि गुणों को भी प्रकट किया गया है। नारी के ऐसे ही उत्कृष्ट गुणों को प्रस्तुत करते हुए संस्कृत साहित्य जगत् में अनेक प्रसिद्ध कवियों द्वारा अनेक उत्कृष्ट रचनाएँ की गई हैं। इन्हीं में से एक सुप्रसिद्ध महाकवि भास हुए हैं जो जनसाधारण के मनोभावों को एवं विभिन्न परिस्थितियों में उत्पन्न होने वाले मानसिक विकारों का चित्रण बहुत कुशलतापवूक करते हैं।

“स्वप्नवासवदत्तम्” महाकवि भास द्वारा रचित एक प्रसिद्ध संस्कृत नाटक है, जिसमें राजा उदयन, वासवदत्ता और प‌द्मावती के माध्यम से प्रेम, त्याग तथा राजनीति के समन्वय को दर्शाया गया है। यह नाटक मानवीय भावनाओं, विशेषतः नारी मनोविज्ञान और आंतरिक संघर्षों की सूक्ष्म अभिव्यक्ति करता है। स्वप्नवासवदत्तम् में नारी चित्रण बु‌द्धि, धैर्य, राजनीति बोध, संयम तथा आत्मसम्मान से युक्त व्यक्तित्व के रूप में प्रदर्शित है।

प्रस्ततु शोधपत्र का विषय स्वप्नवासवदत्तम् में अन्तर्द्वंद्व के दो रूप: वासवदत्ता एवं प‌द्मावती है जिसका उ‌द्देश्य दोनों पात्रों के अन्तर्द्वंद्व का विश्लेषण करके, उनके मानसिक एवं बौ‌द्धिक शक्ति को दर्शाना है कि वह दोनों किस प्रकार संयम से प्रेम, कर्तव्य तथा राज्यहित के मध्य संतुलन स्थापित करती हैं। वासवदत्ता का अन्तर्द्वंद्व उसके पति राजा उदयन के प्रति आघात प्रेम तथा राज्यहित के लिए राजा उदयन का दूसरा विवाह कराने से उत्पन्न होता है। दूसरी ओर, प‌द्मावती का अन्तर्द्वंद्व आत्मस्वीकृति से जुड़ा हुआ है।

 शोध उद्देश्य:- वासवदत्ता एवं पद्‌मावती नारी पात्रों के मानसिक भावों यथा- अन्तर्द्वंद्व, त्याग, आत्मसंयम आदि का अध्ययन करना इस शोध-पत्र का उद्‌देश्य है। दोनों पात्रों के द्वंद्व के माध्यम से स्त्री मन की सूक्ष्म अभिव्यक्ति तथा इनके मानसिक भावों से इनके व्यक्तित्व का गहन अध्ययन करना इस शोध-पत्र का उद्‌देश्य है।

शोध प्रविधि:- इस शोध पत्र में वर्णात्मक एवं विश्लेषणात्मक पद्ध‌तियों का प्रयोग किया गया है। प्रथमतः महाकवि भास कृत स्वप्नवासवदत्तम् नाटक का अध्ययन किया गया है तथा फिर वासवदत्ता एवं प‌द्मावती के संवादों तथा भाव प्रसंगों का मनोवैज्ञानिक दृष्टि से सूक्ष्म विवेचन करके इनके अन्तर्द्वंद्व को प्रस्तुत किया गया है।

अपेक्षित परिणाम:- स्वप्नवासवदत्तम् में नारी पात्रों के अन्तर्द्वंद्व के माध्यम से उनके त्याग, आत्मसंयम, बुद्धि, धैर्य, विवेक आदि से युक्त व्यक्तित्व को प्रदर्शित किया गया है। महाकवि भास कृत यह नाटक मनोभावों विशेषतः नारी मनोविज्ञान तथा आन्तरिक संघर्षों की सूक्ष्म अभिव्यक्ति करता है।

बीज शब्द:- स्वप्नवासवदत्तम्, अन्तर्द्वंद्व, मनोविज्ञान, पात्र विश्लेषण।

 

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